10 दिन में कारोबार बंद करने के नोटिस पर भड़के व्यापारी, कार्रवाई रोकने और मिक्स लैंड यूज लागू करने की मांग
भोपाल। नगर निगम भोपाल द्वारा आवासीय परिसरों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जारी किए जा रहे नोटिसों के विरोध में शहर का व्यापारी वर्ग खुलकर सामने आ गया है। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) ने इस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश सरकार से मांग की है कि जब तक इस समस्या का कोई स्थायी एवं व्यावहारिक समाधान नहीं निकलता, तब तक व्यापारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोक दी जाए। साथ ही, भोपाल की प्रमुख सड़कों और व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों में मिक्स लैंड यूज़ (Mixed Land Use) की व्यवस्था लागू कर व्यापारियों और आम नागरिकों को राहत दी जाए।
इसी मांग को लेकर भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष गोविंद गोयल के नेतृत्व में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की।
10 दिन में व्यवसाय बंद करने के नोटिस से बढ़ी चिंता
चेंबर ने बताया कि नगर निगम भोपाल की भवन अनुज्ञा शाखा द्वारा 17 जुलाई 2026 से बड़ी संख्या में व्यापारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन नोटिसों में उन्हें सिर्फ 10 दिनों के भीतर या तो अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद करने अथवा संबंधित परिसरों को पूरी तरह आवासीय स्वरूप में परिवर्तित करने के निर्देश दिए गए हैं।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि इस आदेश को वर्तमान स्वरूप में लागू किया गया तो हजारों प्रतिष्ठान प्रभावित होंगे और उनसे जुड़े लाखों लोगों की आजीविका संकट में पड़ जाएगी।
21 साल से नया मास्टर प्लान नहीं, व्यापारियों की मजबूरी बना आवासीय परिसर
चेंबर ने कहा कि भोपाल विकास योजना (मास्टर प्लान) का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था, लेकिन उसके बाद आज तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। परिणामस्वरूप शहर के तेजी से विकसित हुए क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या में व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं कराए जा सके।
इसी कारण 10 नंबर मार्केट, अरेरा कॉलोनी, 11 एवं 12 नंबर मार्केट, 1100 क्वार्टर्स, सहयोग विहार, बावड़िया कला, रोहित नगर सहित नए भोपाल के अनेक प्रमुख मार्गों पर हजारों व्यापारी वर्षों से आवासीय परिसरों से ही अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।
चेंबर का कहना है कि इन क्षेत्रों में अस्पताल, बैंक, क्लीनिक, शोरूम, कार्यालय, सेवा केंद्र और अन्य प्रतिष्ठान वर्षों से संचालित हैं और स्थानीय नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं।
व्यावसायिक टैक्स ले रही सरकार, फिर भी कारोबार बंद करने के आदेश
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने कहा कि जिन प्रतिष्ठानों को बंद करने के नोटिस दिए जा रहे हैं, वे नियमित रूप से व्यावसायिक दर से संपत्ति कर, कमर्शियल बिजली शुल्क तथा शासन द्वारा निर्धारित अन्य करों और शुल्कों का भुगतान कर रहे हैं। इससे सरकार और नगर निगम को हर वर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है।
चेंबर का कहना है कि जब शासन स्वयं इन प्रतिष्ठानों से व्यावसायिक दरों पर कर और शुल्क वसूल रहा है, तब अचानक उन्हें अवैध मानते हुए व्यवसाय बंद करने के निर्देश देना उचित नहीं माना जा सकता।
करोड़ों का निवेश और बैंक ऋण पर मंडराया संकट
चेंबर ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि अधिकांश व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए वर्षों की मेहनत और जीवनभर की बचत निवेश की है। बड़ी संख्या में व्यापारियों ने टर्म लोन, मॉर्टगेज लोन, कैश क्रेडिट लिमिट सहित विभिन्न बैंक ऋण लेकर अपने व्यवसाय खड़े किए हैं।
यदि उन्हें मात्र 10 दिनों के भीतर प्रतिष्ठान बंद करने के लिए बाध्य किया गया तो ऋण की किश्तें चुकाना कठिन हो जाएगा। इससे उनकी आर्थिक स्थिति, व्यापारिक साख, बाजार में प्रतिष्ठा और परिवार की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न होगा।
उधारी वसूली और रोजगार पर भी पड़ेगा असर
चेंबर ने चेतावनी दी कि व्यापार बंद होने की स्थिति में व्यापारियों द्वारा ग्राहकों एवं संस्थानों को दी गई उधारी की वसूली भी प्रभावित होगी। बाजार में उनकी विश्वसनीयता कम होने से भुगतान अटक सकते हैं, जिससे वे कर्मचारियों के वेतन, बैंक की किश्तों और अन्य वित्तीय दायित्वों का समय पर निर्वहन नहीं कर पाएंगे।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि इसका असर केवल व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे व्यापारिक तंत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।
सरकार से अंतरिम नीति और मिक्स लैंड यूज़ लागू करने की मांग
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जब तक नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो जाता, तब तक नगर निगम की समस्त दंडात्मक कार्रवाई स्थगित की जाए।
साथ ही, भोपाल की प्रमुख सड़कों एवं वर्षों से व्यावसायिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों को मिक्स लैंड यूज़ नीति के अंतर्गत शामिल किया जाए। चेंबर का कहना है कि इससे व्यापारियों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, नागरिकों को आवश्यक सेवाएं मिलती रहेंगी और शहर के विकास की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप नियोजन भी संभव होगा।
व्यापारिक संगठनों ने सरकार से तत्काल निर्णय की अपेक्षा जताई
चेंबर के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल व्यापारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था, रोजगार और नागरिक सुविधाओं से जुड़ा विषय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
प्रेस वार्ता में ये रहे उपस्थित
प्रेस वार्ता का संचालन भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव अजय देवनानी ने किया। इस अवसर पर बीसीसीआई के पदाधिकारी अरविंद जैन, सुनील जैन ‘जैनाविन’, प्रदीप सेवानी, अजय गुप्ता, गोपाल सोनी तथा 10 नंबर व्यापारी महासंघ के आनंद सोनी, मुकेश जैन, सुनील साहू सहित विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
मुख्य बातें
- नगर निगम के 10 दिन में कारोबार बंद करने वाले नोटिस का विरोध।
- मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा गया ज्ञापन।
- स्थायी समाधान तक सभी दंडात्मक कार्रवाई रोकने की मांग।
- प्रमुख मार्गों पर मिक्स लैंड यूज़ लागू करने की मांग।
- नया मास्टर प्लान लागू होने तक अंतरिम नीति बनाने का सुझाव।
- व्यापारियों ने बताया— करोड़ों का निवेश, बैंक ऋण और लाखों लोगों की आजीविका दांव पर।
- व्यापारिक संगठनों ने कहा— यह केवल व्यापार नहीं, शहर की अर्थव्यवस्था और नागरिक सुविधाओं का भी प्रश्न है।